सत्यानुसरण 30

पड़े-पड़े मरने से चलकर मरना अच्छा है।

जो बोलने में कमकाम में अधिक हैवही है प्रथम श्रेणी का कर्मीजो जैसा बोलता हैवैसा ही करता हैवह है मध्यम श्रेणी का कर्मीजो बोलता अधिक हैकरता कम हैवह है तृतीय श्रेणी का कर्मीऔर जिसे बोलने में भी आलस्यकरने में भी आलस्यवही है अधम।

दौड़ कर जाओकिंतु हाँफ  जानाऔर ठोकर खाकर जिसमें गिर  पडोदृष्टि रखो।

जिस काम में तुम्हें विरक्ति और क्रोध  रहा हैनिश्चय जानो वह व्यर्थ होने को है।

कार्य साधन के समय उससे जो विपदा आएगीउसके लिए राजी रहोविरक्त या अधीर  होनासफलता तुम्हारी दासी होगी।

चेष्टा करोदुःख  करोकातर मत होओसफलता आएगी ही।

कार्यकुशल का चिह्न दुःख का प्रलाप नहीं।

उत्तेजित मस्तिष्क और वृथा आडम्बरयुक्त चिंता-दोनों ही असिद्धि के लक्षण हैं।

विपदा को धोखा देकर और परास्त कर सफलता-लक्ष्मी लाभ करोविपदा जिसमें तुम्हें सफलता से वंचित  करे।

सुख अथवा दुःख यदि तुम्हारा गतिरोध नहीं करे तब तुम निश्चय गंतव्य पर पहुँचोगेसंदेह नहीं।

--:श्री श्री ठाकुर अनुकुलचंद्र 

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ठाकुर जी की उपरोक्त पंक्तियों में कार्य की प्रकृतिकर्मठताऔर सफलता की प्राप्ति के लिए आवश्यक गुणों पर प्रकाश डाला गया है। निम्नलिखित है इन पंक्तियों का भावार्थ:

  1. कर्म की श्रेणियाँ:
    • ठाकुर जी ने कर्म करने की तीन श्रेणियों की व्याख्या की है:
      • प्रथम श्रेणी का कर्मी: वह व्यक्ति जो बोलने में कम और काम में अधिक है। उसके कार्य में सच्चाई और समर्पण होता है।
      • मध्यम श्रेणी का कर्मी: वह व्यक्ति जो बोलता है और उसके कार्य भी उसके बोलने के अनुरूप होते हैं। उसके काम में समर्पण तो होता हैपर वह बोलने में भी समय बर्बाद करता है।
      • तृतीय श्रेणी का कर्मी: वह व्यक्ति जो बहुत बोलता है और करता कम है। उसका काम में योगदान कम होता है और वह केवल बातें करता है।
      • अधम कर्मी: वह व्यक्ति जो न तो बोलने में सक्रिय है और न ही काम करने में। उसकी निष्क्रियता स्पष्ट रूप से उसकी क्षमता को दर्शाती है।
  2. कार्य की दिशा में ध्यान:
    • कार्य करते समय ध्यान रखें कि काम करते समय ठोकर न लगे और हाँफते हुए न जाएं। यदि आप गिरने से बच सकते हैंतो आपका ध्यान स्थिर रहेगा और आप सफल हो सकेंगे।
  3. विरक्ति और क्रोध:
    • यदि किसी कार्य में आप विरक्ति और क्रोध महसूस करते हैंतो समझें कि वह कार्य सफल नहीं होगा। कार्य करने में धैर्य और समर्पण होना चाहिए।
  4. कार्य साधन के समय विपदा स्वीकारना:
    • जब आप किसी कार्य को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाते हैंतो विपदा आना स्वाभाविक है। आपको उन विपदाओं को स्वीकार करना होगा और उनमें से होकर सफलता प्राप्त करनी होगी।
  5. दुःख और कातरता:
    • कार्यकुशलता का संकेत दुःख की शिकायत नहीं है। कातर होने की बजायकार्य में समर्पण और धैर्य रखकर प्रयास करते रहना चाहिए।
  6. उत्तेजित मस्तिष्क और चिंता:
    • उत्तेजित मस्तिष्क और निरर्थक चिंता सफलता की ओर संकेत नहीं देतीं। मानसिक शांति और सतर्कता से ही काम को सही दिशा में ले जाया जा सकता है।
  7. विपदा का सामना:
    • विपदाओं को धोखा देकर और उन्हें परास्त करके ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। यदि विपदा आपको सफलता से रोकती हैतो उसे पराजित करना आवश्यक है।
  8. सुख और दुःख का प्रभाव:
    • यदि सुख या दुःख आपके मार्ग में अवरोध नहीं बनते हैंतो आप निश्चित रूप से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

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प्रश्नोतरी:

  1. ठाकुर जी के अनुसारकर्मियों की तीन श्रेणियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर:

      • प्रथम श्रेणी का कर्मी: जो बोलने में कम और काम में अधिक है।
      • मध्यम श्रेणी का कर्मी: जो बोलता है और करता भी है।
      • तृतीय श्रेणी का कर्मी: जो बोलता बहुत है और करता कम है।
      • अधम कर्मी: जो बोलने और काम करने दोनों में आलसी होता है।
  1. कार्य करते समय ठोकर और हाँफने से बचने की सलाह का क्या महत्व है?

उत्तर: ठोकर और हाँफने से बचने का महत्व इस बात में है कि यदि आप स्थिर दृष्टि और समर्पण के साथ काम करते हैंतो आप गिरने से बच सकते हैं और सफल हो सकते हैं।

  1. विरक्ति और क्रोध का कार्य पर क्या प्रभाव होता है?

उत्तर: विरक्ति और क्रोध कार्य की सफलता को प्रभावित करते हैं। यदि आप किसी कार्य में विरक्ति और क्रोध महसूस करते हैंतो वह कार्य सफल नहीं होगा।

  1. कार्य साधन के समय विपदा को स्वीकार करने की सलाह का क्या मतलब है?

उत्तर: कार्य के दौरान विपदाएँ आना स्वाभाविक हैं। इन्हें स्वीकार करके और इनसे निपटकर सफलता प्राप्त की जा सकती है।

  1. दुःख और कातरता का कार्यकुशलता से क्या संबंध है?

उत्तर: कार्यकुशलता का संबंध दुःख की शिकायत से नहीं है। कातर होने के बजाय कार्य में समर्पण और धैर्य रखना चाहिए।

  1. उत्तेजित मस्तिष्क और आडम्बरयुक्त चिंता का क्या असर होता है?

उत्तर: उत्तेजित मस्तिष्क और आडम्बरयुक्त चिंता असफलता के संकेत होते हैं। मानसिक शांति और सतर्कता से काम करना अधिक प्रभावी होता है।

  1. विपदा को परास्त करके सफलता प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: विपदाओं को धोखा देकर और उन्हें परास्त करके सफलता प्राप्त की जा सकती है। विपदा को आपके सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बनना चाहिए।

  1. सुख और दुःख का गंतव्य पर पहुँचने पर क्या असर होता है?

उत्तर: यदि सुख और दुःख आपके मार्ग में अवरोध नहीं बनते हैंतो आप निश्चित रूप से अपने गंतव्य पर पहुँच सकते हैं।

  1. प्रथम श्रेणी के कर्मी की विशेषता क्या है?

उत्तर: प्रथम श्रेणी का कर्मी वह है जो कम बोलता है और अधिक काम करता है।

  1. अधम कर्मी की पहचान कैसे की जा सकती है?

उत्तर: अधम कर्मी वह है जो न तो बोलने में सक्रिय है और न ही काम करने मेंअर्थात् वह दोनों ही दृष्टियों से आलसी होता है।

 

 

 

 


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