प्रस्तावना

मेरा आत्मअनुभव 

परम पूज्य श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र की इस अमृतमयी कृति “सत्यानुसरण” का अध्ययन करते हुए मेरे अंतर्मन में जो जागरण हुआ, उसे शब्दों में व्यक्त करना सरल नहीं है। फिर भी, एक विनम्र साधिका के रूप में मैं अपने अनुभव को साझा करना चाहती हूँ—

मैंने “सत्यानुसरण” से क्या सीखा?

इस पवित्र ग्रंथ ने मुझे सबसे पहले यह सिखाया कि—
सत्य बाहर नहीं, मेरे अपने भीतर है

मैंने यह समझा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ या बाहरी आडंबर नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत संबंध है—मेरे और मेरे जीवंत गुरु के बीच।

“सत्यानुसरण” ने मुझे सिखाया—

  • अपने भीतर झाँकना
  • अपने दोषों को पहचानना
  • अहंकार को त्यागकर समर्पण करना
  • और हर परिस्थिति में सत्य के मार्ग पर अडिग रहना

मैंने यह भी अनुभव किया कि—
जब हम अपने महागुरु की वाणी को केवल पढ़ते नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन प्रारंभ होता है।

इस पुस्तक ने मेरे भीतर श्रद्धा, साहस, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति को जागृत किया।
इसने मुझे यह अनुभव कराया कि मैं अकेली नहीं हूँ—
मेरे गुरु मेरे साथ हैं, मेरा मार्गदर्शन कर रहे हैं।

यह पुस्तक विश्व के हर मानव के लिए क्यों उपयोगी है?

मेरी दृष्टि में “सत्यानुसरण” केवल एक धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन का सार्वभौमिक मार्गदर्शन है।

आज का मनुष्य—चाहे वह किसी भी देश, भाषा या संस्कृति से जुड़ा हो—
अशांति, भ्रम, भय और असंतोष से जूझ रहा है

ऐसे समय में यह पुस्तक—

  • उसे आंतरिक शांति प्रदान करती है
  • उसे सत्य और असत्य में अंतर करना सिखाती है
  • उसे स्वयं से जोड़ती है
  • और उसे एक जीवंत मार्गदर्शक (गुरु) की आवश्यकता का अनुभव कराती है

“सत्यानुसरण” हमें यह सिखाती है कि—
मनुष्य का वास्तविक उत्थान बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आंतरिक जागरण से होता है

यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिए उपयोगी है—

  • जो अपने जीवन का उद्देश्य खोजना चाहता है
  • जो सत्य और शांति की तलाश में है
  • जो अपने भीतर की शक्ति को पहचानना चाहता है

मैं, पुष्पा बजाज (शिलांग), अपने परमप्रिय ठाकुर जी के चरणों में कृतज्ञतापूर्वक नमन करती हूँ कि उन्होंने इस दिव्य कृति के माध्यम से हम सभी को सत्य का मार्ग दिखाया।

मेरी विनम्र प्रार्थना है—
हर मानव इस “सत्यानुसरण” को केवल पढ़े नहीं, बल्कि अपने जीवन का आधार बनाए

क्योंकि—
यही वह मार्ग है, जो हमें
अंधकार से प्रकाश,
अशांति से शांति,
और असत्य से सत्य की ओर ले जाता है।


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